धरसीवा क्षेत्र में बदस्तूर जारी है मुरूम मिट्टी बेचने का काला कारोबार
तालाबों को सौंदर्यीकरण के नाम पर बना रहे मौत के तालाब
सुरेंद्र जैन/धरसीवां
धरसीवां क्षेत्र में लंबे समय से मुरूम मिट्टी बेचने अवैध उत्खनन का काला कारोबार बदस्तूर जारी है और यह काम बड़े ही शातिर अंदाज में तालाबों के सौंदर्यकरण के नाम पर किया जाता है हाल ही में महौगांव में भी गांव के तालाब से भारी मात्रा में मुरूम निकली गई ओर उसे इतना गहरा कर दिया कि वह किसी मौत के तालाब से कम नहीं लेकिन जब मामला उजागर हुआ तो अब उस तालाब के सौंदर्यकरण की अनुमति ली जा रही है।
जानकारी के मुताबिक धरसीवा क्षेत्र के अधिकांश गांवों में मुरूम भारी मात्रा में है और जगह जगह निर्माण कार्यों में मुरूम मिट्टी की मांग हमेशा बनी रहती है एक हाइवा मुरूम सात आठ हजार से कम की नहीं बिकती लेकिन मुरूम मिलना आसान नहीं रहता सूत्र बताते हैं कि जिन्हें भारी मात्रा में मुरूम की आवश्यकता होती है वह ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से संपर्क करते हैं और फिर साफ सफाई के नाम पर ग्रीष्म काल में भी तालाबों को खाली करा देते हैं हालांकि तालाबों साफ सफाई बारिश के पूर्व कराना चाहिए ताकि बारिश में तालाब अच्छे से भर जाए ओर फिर ग्रीष्म काल तक ग्रामीणों को पानी की कोई दिक्कत न हो लेकिन मुरूम मिट्टी बेचकर लाखों रुपए कमाने के चक्कर में ग्रीष्म काल में भी तालाबों को खाली कराकर ग्रामीणों ओर मूक प्राणियों के सामने निस्तारी का संकट पैदा किया जाता है यह क्रम धरसीवां क्षेत्र के अधिकांश गांवों में लंबे समय से जारी है इसमें खनिज विभाग की मौन सहमति भी कई सवालों को जन्म देती है
*महौगांव का तालाब बना दिया मौत का तालाब*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धरसीवा के महौगांव का तालाब ग्रामीणों के लिए निस्तार का प्रमुख माध्यम है पानी से लबालब भरे इस तालाब को ग्रीष्म काल शुरू होते ही करीब माहभर पहले अचानक खाली करा दिया गया ओर वहां से मशीनों की मदद से सैंकड़ों हाइवा मुरूम निकालकर अन्यत्र भेज दी गई लेकिन जब भाजपा नेताओं को यह मामला सत्ताधारी दल के संगठन से जुड़े लोगों को पता चला तो उन्होंने मौके पर जाकर काम रुकवा दिया
भारी मात्रा में तालाब से मुरूम निकलने के कारण तालाब इतना गहरा हो गया है कि यह ग्रामीणों के लिए किसी मौत के तालाब से कम नहीं है
*अवैध उत्खनन के बाद अनुमति के प्रयास*
महौगांव के तालाब से भारी मात्रा में लाखों रुपए कीमत की मुरूम निकालकर उसे मौत का तालाब बनाने के बाद अब जिम्मेदार अधिकारियों से तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर खनन की अनुमति लेने के प्रयास किए जा रहे हैं


