अक्षय फल प्राप्ति की शुभ तिथि है अक्षय तृतीया--पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री

 अक्षय फल प्राप्ति की शुभ तिथि है अक्षय तृतीया--पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री




गोबरा नवापारा नगर 

आज विप्र कुल भूषण भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री परशुराम का जन्मोत्सव है, आज ही के दिन उनका प्राकट्य हुआ था , ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका की सन्तान के रूप में परशुराम जी अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध आक्रोश का नाम है, जो महादेव शिव के द्वारा प्रदत्त फरसे से आतताइयो का सर्वनाश कर देते हैं, आज प्रातः 10.49से तृतीया तिथि शुरू हो रही है भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया की रात्रि को प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए आज सकल ब्राह्मण समाज द्वारा उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है, कल सोमवार को प्रातः 7.28बजे तक तृतीया तिथि है, और सूर्योदय सुबह 5.44बजे हो रहा है, इसलिए उदियात तिथि को मानने वाले वैष्णव जन 20अप्रैल को  आखा तीज मानेंगे, दोनों दिन अक्षय तृतीया होने के कारण सनातन धर्मियों के इस त्यौहार की महिमा बढ़ गई है, आज कृतिका नक्षत्र होने के कारण यह तिथि विशेष फल दायिनी हो गई है, त्रेता युग के प्रारम्भ होने की तिथि, भगवान नर नारायण, परशुराम और हयग्रीव के अवतार की तिथि भी यही होने के कारण इस तिथि को अक्षय पुण्य प्रदान करने वाली परम पावन तिथि कहा गया है, 

पुराणों के अनुसार आज के दिन किया गया शुभ या अशुभ कृत्य अक्षय हो जाता है और जन्म जन्मांतर में सुख दुख का कारण बनता है, शास्त्री जी कहते हैं तो क्यों न मन, वचन और कर्म से हम पाप कर्मों से बचने का अभ्यास करें और अच्छे काम करके अक्षय हो जाएं आज के दिन स्नान दान का विशेष महत्व है, ऋतु के अनुसार जल से भरा हुआ घड़ा, खरबूज, तरबूज, ठंडाई,पंखे, चरण पादुकाएं, छाता, गौ माता, सत्तू, ककड़ी,भीगे हुए चने की दाल आदि का दान करना चाहिए, चूंकि यह अक्षय पुण्य प्रदायक तिथि है, देव तिथि है इसलिए गृहस्थ जीवन के सबसे प्रमुख दायित्व अपनी कन्या का विवाह करना, तो लोग कन्या दान करते हैं, आज के दिन देश भर में बहुत शादियां होती है, भूमि, स्वर्ण, आभूषण आदि खरीदने को बड़ा शुभ माना जाता है, आज के दिन का विशेष महत्व इसीलिए भी है कि चारों धाम के प्रमुख बद्री केदार की यात्रा भी आज से शुरू होती है, बृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में केवल आज ही भगवान की श्री चरणों के दर्शन होते हैं, ज्योतिषी गण बाजार में तेजी मंडी की गणना भी आज के दिन करते हैं,आज  व्रत करने, रात्रि जागरण कर भजन कीर्तन करने का विशेष महत्व है

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