दुलना एनीकेट पर मंडरा रहा संकट का काला साया! महानदी में माफिया राज: अवैध रेत खनन और ओवरलोड हाइवा से खतरे में जल आपूर्ति का ढांचा

 दुलना एनीकेट पर मंडरा रहा संकट का काला साया!
महानदी में माफिया राज: अवैध रेत खनन और ओवरलोड हाइवा से खतरे में जल आपूर्ति का ढांचा


 


नवापारा-राजिम

 गोबरा नवापारा क्षेत्र में महानदी के सीने पर इन दिनों अवैध रेत खनन का खुला खेल चल रहा है। सरकारी नियमों और पर्यावरणीय मानकों को ताक पर रखकर रेत माफिया बेखौफ तरीके से एनीकेट के आसपास खनन कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुलना एनीकेट, जो गोबरा नवापारा और अभनपुर नगर पालिका की जल आपूर्ति का मुख्य आधार है, अब गंभीर खतरे की जद में आ गया है।
एनीकेट के ऊपर से दौड़ रहे मौत के पहिए
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुखी एनीकेट क्षेत्र में भारी मशीनों से रेत निकाली जा रही है। इसके बाद ओवरलोडेड हाइवा एनीकेट की सतह से लगातार गुजर रहे हैं। तकनीकी जानकारों का कहना है कि इस तरह का कंपन और अत्यधिक भार किसी भी जल संरचना की नींव को कमजोर कर सकता है।
यदि समय रहते रोक नहीं लगी, तो एनीकेट की संरचना को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है — और इसका सीधा असर हजारों लोगों की पेयजल आपूर्ति पर पड़ेगा।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जल संसाधन विभाग के केयरटेकर और जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस नींद में हैं?
पहले भी महानदी में हाईटेक मशीनों से अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों की जब्ती के मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद माफिया का मनोबल टूटा नहीं, बल्कि और मजबूत हुआ है। क्या यह केवल लापरवाही है या संरक्षण का खेल?

पर्यावरण और जनहित दोनों पर प्रहार

अवैध रेत खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी सीधा हमला है। नदी की प्राकृतिक धारा और तटबंध की स्थिरता प्रभावित होती है। एनीकेट के पास गहराई बढ़ने से जल संरचना की नींव कमजोर हो सकती है, जिससे दरार या धंसान का खतरा बढ़ जाता है।

जनता की मांग: अब और नहीं
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
संयुक्त टीम बनाकर अवैध खनन पर तत्काल रोक
एनीकेट की तकनीकी जांच और सुरक्षा घेरा सुनिश्चित किया जाए
ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई
दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी
चेतावनी साफ है
यदि दुलना एनीकेट को समय रहते नहीं बचाया गया, तो यह केवल एक संरचना का नुकसान नहीं होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जल संकट और आर्थिक क्षति की शुरुआत होगी।
अब सवाल प्रशासन से है —
क्या दुलना एनीकेट भी लापरवाही की भेंट चढ़ेगा, या जिम्मेदार तंत्र समय रहते जागेगा?

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