(अक्ति-विशेष)-अक्ति पर्व पर आज दिखेगी बच्चों की रसमय शादी
चुलमाटी की रस्म के साथ शुरू हुआ उत्साह
(मोहनदास मानिकपुरी)
आरंग (लखौली)- -------------
अक्षय तृतीया, जिसे छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति में “अक्ति” के नाम से जाना जाता है, कल 19 अप्रैल को ग्रामीण अंचलों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर गांव-गांव में बच्चों की रसमय शादी की अनोखी और जीवंत परंपरा देखने को मिल रही है। उत्सव की शुरुआत आज बेहद पारंपरिक ढंग से हुई, जब सूर्यास्त के बाद गांव की नन्हीं बालिकाओं ने सामूहिक रूप से 'चुलमाटी' की रस्म अदा की। पारंपरिक गीतों के बीच बच्चियां निश्चित स्थान से मिट्टी लेकर आईं, जिससे विवाह के लिए वेदी और चूल्हा तैयार किया गया।चुलमाटी के बाद अब घर-आंगन में उत्साह का माहौल देखते ही बनता है। बच्चे अपने-अपने पुतला-पुतली को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाने में जुटे हैं। दोपहर बाद गांव की गलियों में नन्हीं बारातें निकलेंगी, जहाँ बच्चे ढोलक और थाली की थाप पर थिरकते हुए अपनी खुशियों का इजहार करेंगे। इस दौरान हल्दी, मंडप, सात फेरे और विदाई जैसी सभी रस्में ठीक उसी तरह निभाई जा रही हैं जैसे बड़ों की शादी में होती हैं। इस आयोजन में बुजुर्ग भी बच्चों का उत्साह बढ़ा रहे हैं और उन्हें लोक गीतों व रस्मों की बारीकियां समझाते हुए अपने बचपन की यादों में खो गए हैं।अक्ति का यह पर्व केवल खेल नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की सादगी और सांस्कृतिक धरोहर का सुंदर उदाहरण है। जहाँ एक ओर किसान आज के दिन से खेती-किसानी के नए कार्यों की शुरुआत करते हैं, वहीं बच्चों की यह पुतला-पुतली शादी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और रीति-रिवाजों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। आज पूरा आरंग क्षेत्र मासूम खुशियों, पारंपरिक रस्मों और सांस्कृतिक रंगों के अद्भुत संगम से सराबोर नजर आ रहा है
