सीएम हेल्पलाइन की शिकायत भी बेअसर​ प्रशासन की अनदेखी से भड़का ग्रामीणों का आक्रोश-आरंग-चीख़ली मार्ग पर चक्काजाम

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत भी बेअसर



प्रशासन की अनदेखी से भड़का ग्रामीणों का आक्रोश-आरंग-चीख़ली मार्ग पर चक्काजाम



कुटेला में निस्तारी तालाब को पाटकर रेत माफिया कर रहे अवैध भंडारण


खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल


आरंग


क्षेत्र में रेत के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में नाकाम प्रशासन के खिलाफ आखिरकार जनता का सब्र टूट गया। आरंग के ग्राम पंचायत कुटेला में रेत माफियाओं की मनमानी और अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी से नाराज होकर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने आरंग-चीख़ली मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर ग्रामीणों के बैठते ही मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खनिज विभाग की साठगांठ के चलते क्षेत्र में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण का खेल धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।मामले में रेत माफियाओं की बेखौफ कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने ग्रामीणों के उपयोग वाले निस्तारी तालाब को भी नहीं बख्शा। माफियाओं द्वारा इस तालाब को जबरन पाटकर वहां रेत का अवैध डंपिंग यार्ड बना दिया गया है, जिससे ग्रामीणों के सामने निस्तार का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम सरपंच द्वारा इस संबंध में लगातार स्थानीय स्तर पर शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। हद तो तब हो गई जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत सीधे सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई, परंतु वहां से भी आश्वासन के अलावा धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।इस पूरे घटनाक्रम ने खनिज विभाग को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्र में प्रतिदिन हो रहे करोड़ों रुपये के रेत के इस अवैध खेल पर कार्रवाई न होना विभाग की संदेहास्पद भूमिका को उजागर करता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस अवैध भंडारण को पूरी तरह नहीं हटाया जाता और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगे। इधर, चक्काजाम और बढ़ते हंगामे की सूचना मिलते ही आरंग पुलिस की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंच चुकी है। पुलिस अधिकारी आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराने और सड़क से जाम हटवाने के लिए लगातार समझाइश देने में जुटे हैं, लेकिन ग्रामीण मौके पर ही ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।ग्रामीण इस बात से बेहद आक्रोशित हैं कि जिस व्यवस्था को अवैध कारोबार रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह मूकदर्शक बनी हुई है। सरपंच से लेकर ग्रामीणों तक की गुहार को अनसुना कर प्रशासन ने खुद माफियाओं के हौसले बुलंद किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज जनता को अपनी बुनियादी मांगों के लिए सड़क पर उतरना पड़ा।

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