छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्र चेतना के शाश्वत प्रेरणा स्रोत थे,-- डॉ प्रेमा साईं महाराज,,

  छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्र चेतना के शाश्वत प्रेरणा स्रोत थे,-- डॉ प्रेमा साईं महाराज,,



छत्तीसगढ़ सरकार से की मांग कक्षा पहली से दसवीं तक पाठ्यक्रम में शिवा जी की जीवनी को शामिल करें,,



 अभनपुर

राष्ट्रीय शिव जन्म उत्सव सोहला का कार्यक्रम मां मातंगी दिव्य धाम में भव्य रूप से मनाया गया।

इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी की राष्ट्रीय गौरव यात्रा नासिक से जगन्नाथ पुरी होते हुए मां मातंगी धाम जीजामगांव  बिरेझर पहुंची,, इस दौरान राष्ट्रीय गौरव यात्रा का भव्य स्वागत मां मातंगी धाम के पीठाधीश्वर डॉ प्रेमा साईं महाराज के नेतृत्व में रथ का भव्य बाजे गाजे के साथ स्वागत किया गया।

राष्ट्रीय गौरव यात्रा रथ के साथ-भगवान महाकाल का स्वरूप के साथ मा मातंगी धाम होते हुए जामगांव बिरेझर भ्रमण किया गया इस दौरान हजारों की संख्या में ग्राम वासी बाजे गाजे के छत्रपति शिवाजी महाराज की  जयकारे लगाते हुए। यात्रा की।

[: मां मातंगी धाम के पीठाधीश्वर डॉ प्रेमा साईं महाराज मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि यह समस्त छत्तीसगढ़ वासियों के लिए गौरव का विषय है कि आज महाराज छत्रपति शिवाजी का गौरव रथ यात्रा या धाम पहुंची है इस रथ का उद्देश्य यह है कि शिवाजी की उद्देश्य, नीति को हर सनातनी जागे और अपने अंदर संयोजे, पहले जहां छत्रपति शिवाजी महाराज की बात आती थी सच्चे सनातनी अपने रक्त की आहुति दे देते थे, सिर्फ इस भगवा ध्वज के लिए इस भगवा ध्वज हमें सच्ची सनातनियों का होने का सीख देता है,,

,, प्रेमा साई जी ने कहा छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण हो रहा है उसे धर्मांतरण की रीड की हड्डी को हम सब मिलकर तोड़ना है, उन्होंने कहा कि शिवाजी को मैं अपना जीवन का प्रेरणा स्रोत मानता हूं जब भी जीवन में कोई संकट आता है उनकी शौर्य गाथा को याद करता हूं,,,

,,, डॉ प्रेमा साईं महाराज ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि कक्षा पहली से दसवीं तक कम से कम एक-एक अध्याय छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्य गाथा का वर्णन हो, यह हर बच्चे के मन में छत्रपति शिवाजी की जीवनी याद रहे और वह सच्चे सनातनी बने,,

 छत्रपति शिवाजी 

भारतीयों के मन में यह विश्वास जगाया कि पराधीनता उनकी नियति नहीं है। उन्होंने जनमानस को आत्मसम्मान और साहस का पाठ पढ़ाया: छत्रपति शिवाजी महाराज एक विचार जो अमर है केवल इतिहास के पन्नों में सीमित नाम नहीं हैं। वे राष्ट्र चेतना के शाश्वत प्रेरणास्रोत हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि साहस और दूरदृष्टि मिलकर इतिहास की धारा बदल सकते हैं। उन्होंने दिखाया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो जनता को भय से मुक्त कर आत्मविश्वास से भर दे। आज आवश्यकता है कि हम उन्हें केवल स्मारकों, आयोजनों या नारों तक सीमित न रखें, बल्कि उनके आदर्शों को अपने आचरण और नीतियों में उतारें।

,,इस अवसर पर मा मातंगी दिव्य धाम में जस गीत सम्राट दुकालू यादव का जस गीत का कार्यक्रम रखा गया था जिसमें श्रोता माता की जस गीत से झूम उठे,,,

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