महानदी में बने पुल का नाम "रानी पद्मावती" के नाम पर रखने किए थे मांग

 पीपला फाउंडेशन ने जताया डॉ पाणिग्राही का आभार 


महानदी में बने पुल का नाम "रानी पद्मावती" के नाम पर रखने किए थे मांग 

आरंग

 स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने संबलपुर डीविजन के डीआर यू सी सी मेम्बर डॉ  विश्वनाथ पाणीग्रही के माध्यम से रेलवे द्वारा आयोजित डी आर यू सी सी मीटिंग में महानदी पर बने नए  रेल पुल का नामकरण महादानी राजा मोरध्वज की धर्मपत्नी  "रानी पद्मावती"  के नाम पर रखने की मांग किए थे।  




फाउंडेशन व क्षेत्र की जनता से जुड़ी इस मांग को डॉ विश्वनाथ ने  बैठक में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया फांऊडेशन और आरंग क्षेत्र की जनता की जनभावनाओं के अनुरूप महानदी पर बने पुल का नामकरण"रानी पद्मावती " के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा था जिसे रेलवे ने स्पष्टीकरण देते हुए अस्वीकार कर दिया‌। रेलवे ने स्पष्टीकरण दिया है कि इस तरह का पौराणिक या ऐतिहासिक व्यक्ति विशेष के नाम पर कोई पुल का नामकरण का प्रावधान रेलवे में नहीं  है । डॉ पाणीग्राही  ने कहा कि  डिविजनल अधिकारियों के द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद भी मैं निराश नहीं हूं तथा इस मांग को रेलवे के उच्चाधिकारियों एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी के समक्ष रखूंगा ।   पीपला फाउंडेशन ने डीआर यू सी सी मेंबर डॉ विश्वनाथ पाणिग्राही का उनके द्वारा फाउंडेशन व क्षेत्र की जनता की मांग को डी आर यू सी सी की मीटिंग में प्रमुखता से रखने के लिए आभार जताया है। वहीं फाउंडेशन के सदस्यों का कहना है महादानी राजा मोरध्वज की धर्मपत्नी महादानी रानी पद्मावती के नाम को अधिकांश लोग जानते भी नहीं है जिन्होंने अपने एकलौते पुत्र ताम्रध्वज को आरा में चिरकर भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन को अर्पित कर दी थी। उनके नाम पर आज तक कहीं कोई अस्पताल,स्कूल, कालेज, धर्मशाला, कोई पुल नहीं है। जिससे कि लोग रानी पद्मावती को स्मरण कर सके। ज्ञात हो कि यह संस्था महादानी राजा मोरध्वज व रानी पद्मावती से जुड़ी गाथा को स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करने लगातार मांग कर रहे हैं।

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