आत्मा और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य का अहसास होना (भाग 2)

 आत्मा और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य का अहसास होना (भाग 2)





आत्मा एक नॉन-फिजिकल एनर्जी है, जो शरीर को उसी तरह चलाती है जैसे इलेक्ट्रिकल एनर्जी से टीवी चलता है।

बिना इलेक्ट्रिकल एनर्जी के टीवी, चाहे उसमें सभी पार्ट्स मौजूद हों, न तो तस्वीर दिखा सकता है और न ही जानकारी दे सकता है। उसी तरह, शरीर में सभी अंग और सिस्टम होने के बाद भी आत्मा के बिना शरीर कोई काम नहीं कर सकता। जैसे ही आत्मा शरीर से निकलती है, हृदय और अन्य अंग काम करना बंद कर देते हैं, यहाँ तक कि मस्तिष्क भी सक्रिय नहीं रहता। क्योंकि आत्मा ही शरीर को चलाने वाली मुख्य शक्ति है।

आत्मा मस्तिष्क के पास, हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड के पास स्थित मानी जाती है। वह मस्तिष्क के माध्यम से हमारी पाँचों इंद्रियों—आँख, नाक, कान, जीभ और हाथ—को नर्वस और हार्मोनल सिस्टम द्वारा नियंत्रित करती है। मस्तिष्क आत्मा और शरीर के सभी अंगों के बीच एक सेतु (ब्रिज) का काम करता है।

क्या आप जानते हैं कि विज्ञान द्वारा संवेदनशील उपकरणों से जिन मस्तिष्क गतिविधियों का पता लगाया गया है, वे वास्तव में आत्मा के अस्तित्व के कारण ही संभव हो पाई हैं?

है, तो हमारे इस फिजिकल मस्तिष्क में किसी भी प्रकार की गतिविधि दर्ज नहीं की जा सकती थी। तब मस्तिष्क भी पूरी तरह शांत ही रहता।

असल में सोचने का कार्य मस्तिष्क नहीं, बल्कि मन करता है।

मन नॉन-फिजिकल है और आत्मा का ही एक भाग है। मस्तिष्क तो केवल उन संकेतों को पकड़ता है और उन्हें शरीर के माध्यम से व्यक्त करता है। इसलिए जो भी विचार, भाव या संकल्प उत्पन्न होते हैं, वे आत्मा से निकलकर मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।

आत्मा और शरीर के संबंध को हम कंप्यूटर के उदाहरण से भी समझ सकते हैं। जैसे कंप्यूटर में सीपीयू (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) होता है, वैसे ही हमारा मस्तिष्क काम करता है। जबकि आत्मा कंप्यूटर के प्रोग्रामर की तरह है, जो निर्देश देती है। मस्तिष्क आत्मा से मिले विचारों, शब्दों और कर्मों को प्रोसेस करता है और शरीर उन्हें व्यक्त करता है।

हमारा शरीर कंप्यूटर के मॉनिटर की तरह है, जो मस्तिष्क द्वारा प्रोसेस की गई चीज़ों का अंतिम रूप दिखाता है। यानि जो भी हम सोचते हैं, वे संकेत नॉन-फिजिकल आत्मा द्वारा मस्तिष्क को भेजे जाते हैं। मस्तिष्क इन संकेतों को समझकर उन्हें शरीर की विभिन्न क्रियाओं में बदल देता है। इस प्रकार आत्मा के नॉन-फिजिकल निर्देश मस्तिष्क के माध्यम से फिजिकल रूप में प्रकट होते हैं और हमारे विचार, बोल और कर्म बन जाते हैं।

(कल भी जारी रहेगा….)

Previous Post Next Post
ad inner footer