राजिम की जीवनरेखाएँ संकट में: पैरी–सोंढ़ुर–महानदी की बिगड़ती सेहत पर जन सरोकार जरूरी
प्रकाश वर्मा /राजिम
धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राजिम संगम क्षेत्र में पैरी, सोंढ़ुर और महानदी की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। कभी अविरल और निर्मल बहने वाली ये नदियाँ आज काफ (झाग), गाद, घास-भूस और अव्यवस्थित नदी तल के कारण अपने प्राकृतिक स्वरूप से दूर होती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर नदी का बहाव बाधित हो गया है और नदी क्षेत्र मैदान में तब्दील होता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व में कुंभ मेला एवं अन्य बड़े आयोजनों के दौरान अस्थायी निर्माण, सड़क एवं पंडाल व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में मुरूम नदी क्षेत्र में डाला गया था, जिसे बाद में वैज्ञानिक ढंग से हटाया नहीं गया। इसके चलते नदी की गहराई कम हो गई, जलधारा संकरी पड़ गई और प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। बरसात के बाद भी कई हिस्सों में पानी रुक-रुक कर बहता है, जिससे गाद जमाव और जलकुंभी जैसी घास तेजी से फैल रही है।
नदी की बिगड़ती स्थिति के दुष्परिणाम
नदियों की इस हालत का सीधा असर जलजीवन, पर्यावरण और आमजन पर पड़ रहा है।
जल का ठहराव बढ़ने से प्रदूषण और दुर्गंध की समस्या उत्पन्न हो रही है।
मछलियों एवं जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है।
भविष्य में बाढ़ और जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है।
धार्मिक नगरी राजिम की आस्था और पर्यटन छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
नदी की स्थिति सुधारने के लिए क्या होना चाहिए
विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि नदियों को मूल स्वरूप में लाने के लिए ये कार्य जरूरी हैं—
वैज्ञानिक सर्वे और डी-सिल्टिंग: नदी तल में जमी गाद और मुरूम को चरणबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से हटाया जाए।
प्राकृतिक जलधारा बहाल करना: नदी के पुराने प्रवाह मार्ग को चिन्हित कर अवरोध हटाए जाएँ।
अस्थायी निर्माण पर नियंत्रण: मेलों और आयोजनों के बाद नदी क्षेत्र को पूर्व स्थिति में लाने की अनिवार्य व्यवस्था हो।
घास-भूस और जलकुंभी की सफाई: नियमित सफाई अभियान चलाकर नदी को स्वच्छ रखा जाए।
स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम: जिला स्तर पर नदी संरक्षण समिति गठित कर लगातार निगरानी की जाए।
जन जागरूकता अभियान: आम नागरिकों को नदी संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि गंदगी और अतिक्रमण रोका जा सके।
राजिम की पैरी, सोंढ़ुर और महानदी केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक आत्मा हैं। इन्हें उनके मूल स्वरूप में लौटाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि शासन, समाज और नागरिक मिलकर ठोस एवं दीर्घकालिक योजना के साथ कार्य करें, तो निश्चय ही इन नदियों की खोई हुई पहचान और प्रवाह को फिर से जीवित किया जा सकता है। अब जरूरत है सिर्फ संवेदनशीलता, इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास की।
राजिम विधायक की पहल,अब शुरुआत होगी
कुछ दिन पूर्व राजिम विधायक रोहित साहू ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए दोनों शहर राजिम और नवापारा के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सर्वदलीय बैठक आहट की गई थी जिसमें सकारात्मक परिणाम सामने आया है विधायक ने कहा है कि काफ, गाद और मुरूम को खनन कर निकल जाएगा जिसकी शुरुआत भी जल्द ही हो जाएगी। आने वाले कुछ दिनों में इसका भूमि पूजन भी शुरू होगा और राजिम कुंभ मेला के पहले काफी हद तक नदी की सफाई हो जाने की संभावना है।

