राजिम क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण, छालीवुड की दहलीज पर पहुँचे जी. आर. पारकर

 राजिम क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण, छालीवुड की दहलीज पर पहुँचे जी. आर. पारकर



प्रकाश वर्मा/राजिम(प्रेरणाश्रोत)

 गरियाबंद जिले और विशेष रूप से राजिम क्षेत्र के लिए यह गर्व और गौरव का विषय है कि राजिम के मूल निवासी जी. आर. पारकर ने छालीवुड में निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा है। उनकी निर्देशन में बनी पहली फिल्म “तोता मैना” अब रिलीज़ के लिए पूरी तरह तैयार है। यह फिल्म एक अनछुई, सादगीपूर्ण और भावनात्मक प्रेम कहानी पर आधारित है, जो आज के दौर की फूहड़ता और बनावटीपन से कोसों दूर है।

फिल्म की खास बात यह है कि इसके अधिकांश गीत स्वयं निर्माता-निर्देशक जी. आर. पारकर ने लिखे हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ी माटी की खुशबू साफ झलकती है। गीतों को अपनी मधुर आवाज़ से सुनील सोनी, चम्पा निषाद, संजय एक्का, संगीता रनधारी, माहेश्वरी, महक रात्रे और रेणुश्री बास ने सजाया है। संगीत और शब्दों का यह संगम श्रोताओं के दिल को छूने वाला है।

फिल्म की अधिकतर शूटिंग लफंदी क्षेत्र में की गई है, जहाँ की प्राकृतिक सुंदरता ने कहानी को और भी जीवंत बना दिया है। दर्शकों और फिल्म समीक्षकों ने फिल्म की सादगी, पारिवारिक मूल्यों और साफ-सुथरे कथानक की खुले दिल से सराहना की है।

एक और उल्लेखनीय बात यह है कि राजिम के पहले छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता जी आर पारकर इस फिल्म “तोता मैना” का जोर-शोर से प्रमोशन कर रहे हैं। वे लगातार छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई पहचान दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

निर्माता-निर्देशक जी. आर. पारकर ने स्थानीय कलाकारों को भरपूर अवसर देकर यह सिद्ध किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। इसी कड़ी में चन्द्रशेखर मिश्रा, भूतपूर्व बीईओ, फिल्म में लीड रोल में नजर आएंगे, जो क्षेत्र के लिए और भी गर्व की बात है।

फिल्म की एडिटिंग, डबिंग एवं अन्य तकनीकी कार्य पारकर स्टूडियो में ही पूरे किए गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की मजबूत होती नींव को दर्शाता है।

कुल मिलाकर, “तोता मैना” न सिर्फ एक फिल्म है, बल्कि राजिम और गरियाबंद जिले के सपनों की उड़ान है, जो यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ की धरती से निकलकर भी छालीवुड तक पहुँचा जा सकता है।

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