बालिका दिवस पर विशेष विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन, 1250 से अधिक बालिकाएं हुईं लाभान्वित

बालिका दिवस पर विशेष विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन, 1250 से अधिक बालिकाएं हुईं लाभान्वित



फिंगेश्वरः

-बालिका दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर एवं जिला सत्र न्यायालय गरियाबंद के तत्वावधान में पीएलवी (अधिकार मित्र) द्वारा विशेष विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों का उद्देश्य बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर उन्हें सुरक्षित, सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना रहा। पीएलवी अधिकार मित्र कमलेश कश्यप (थाना फिंगेश्वर), कोमल निषाद (थाना राजिम), विक्रम सोनी (थाना पाण्डुका), टिकेश्वर निषाद (थाना छुरा) एवं प्रेमलाल सिन्हा (थाना गोबरा नवापारा) के माध्यम से यह शिविर आयोजित किए गए। विधिक साक्षरता शिविर रानी श्याम कुमारी देवी कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल फिंगेश्वर, स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय फिंगेश्वर, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल परसदाकला, शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल फिंगेश्वर एवं पूर्व माध्यमिक कन्या शाला फिंगेश्वर में संपन्न हुए। शिविर के दौरान बालिकाओं को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। इसमें बच्चों के लिए बाल मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं योजना, मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवाएं, नालसा डॉन योजना तथा नालसा संवाद योजना से अवगत कराया गया। इसके साथ ही बालिकाओं को शिक्षा का अधिकार, बाल विवाह निषेध अधिनियम, बाल श्रम निषेध कानून तथा सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। शिविर में लगभग बारह सौ पचास बालिकाएं लाभान्वित हुईं। कार्यक्रम के दौरान पीएलवी अधिकार मित्रों ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कानून की जानकारी ही बालिकाओं को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सशक्त बनाती है। बालिका दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने का अवसर है कि बेटियाँ किसी भी रूप में बेटों से कम नहीं हैं। आज बेटियाँ शिक्षा, खेल, विज्ञान, सेना और राजनीति सहित हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी समाज में बाल विवाह, भेदभाव, अशिक्षा एवं कुपोषण जैसी समस्याएं मौजूद हैं, जिन्हें समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। एक बालिका को शिक्षित करना पूरे परिवार और समाज को शिक्षित करने के समान है। अंत में सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया गया कि बालिकाओं को समान अवसर दिए जाएंगे, उनका सम्मान किया जाएगा और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।

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