गैजेट्स के एडिक्शन पर काबू कैसे पाएं?

 गैजेट्स के एडिक्शन पर काबू कैसे पाएं?




क्या आप हर 10 मिनट में अपना फ़ोन चेक करते हैं? और क्या आप तब नर्वस हो जाते हैं जब आपके फोन की बैटरी 20 परसेंट रह जाती है? या फिर क्या आप खाना खाते समय मोबाइल या टीवी स्क्रीन देखना बंद नहीं कर पाते? और जब आप अपने परिवार के साथ होते हैं तो आप ईमेल चेक करना बंद नहीं कर पाते?

गैजेट के उपयोग से लेकर उनके दुरुपयोग तक, इनकी लत हमारी खुशी, स्वास्थ्य और रिश्तों में बाधाएं डाल रही हैं। स्क्रीन देखने के समय को कम करने से आपका समय और एनर्जी दोनों बचते हैं।

इसके लिए पॉवरफुल एफरमेशन क्रिएट करें-

“मैं एक शक्तिशाली प्राणी हूं। मैं अपने गैजेट्स का उपयोग जरूरत पड़ने पर और यूटिलिटी के लिए करता हूं, मैं उनका आदी नहीं हूं। मैं टेक्नोलॉजी के साथ अपने समय को चेक करता रहता हूं। मेरा समय, एनर्जी या आदतें मेरे गैजेट द्वारा कंट्रोल नहीं होती हैं।”

हैं?

डिजिटल स्क्रीन पर जरूरत से ज्यादा समय देने से हम इसके आदी हो सकते हैं। और यह सब हमारी चाहनाओं से शुरू होता है-कि हमें हर समाचार पता होना चाहिए, एक और क्रिकेट मैच देखना है, टीवी शो का एपिसोड देखना है जिसे हमने नहीं देखा था और इसी तरह…

ये थॉट्स एक्शन में बदलते हैं और रिपीटेड एक्शन आदत बन जाते हैं और फिर आदतें लत यानि एडिक्शन में बदल जाती हैं।

इन सबसे बचने के लिए, अपने स्क्रीन टाइम को फिक्स करें और उस शेड्यूल पर तब तक टिके रहें जब तक यह आपकी आदत न बन जाए। आपकी इच्छा शक्ति और आपके इरादों का समर्थन करने वाला डिसिप्लिन; गैजेट की लत को खत्म कर देगा।

अन्य लोगों के जीवन को गैजेट के माध्यम से देखने के बजाय, अपने स्वयं के जीवन के प्रति ज्यादा प्रोडक्टिव बनें। अपने गैजेट्स और टेक्नोलॉजी से हेल्दी तरीके से जुड़ना शुरू करें।

आपके कंप्यूटर, फ़ोन और टीवी ने आपके जीवन को आरामदायक बना दिया है। अपने गैजेट के मास्टर बनें और उन्हें अपना इंस्ट्रूमेंट बनाएं नाकि उनके आदी बनें।

सुनिश्चित करें कि, आपके गैजेट आपके दिमाग को नियंत्रित न करें, और वे आपको खुश या दुखी भी न करें। उनकी यूटिलिटी की सराहना करें, उन्हें यूज़ करने का आनंद लें, जब भी जरूरत पड़े उन्हें यूज़ करें और बिना असहज महसूस किए उनसे अलग हो जाएं।

यदि आप किसी कारणवश इनका उपयोग नहीं कर पाते तो परेशान न हों। दिन में केवल x घंटे के लिए टीवी देखें, जरूरत पड़ने पर अपने कंप्यूटर का उपयोग करें, फ़ोन तभी करें जब आवश्यक हो, नए मैसेज के लिए फोन को चेक न करते रहें, मीडिया और सोशल मीडिया पर सब कुछ न पढ़ें, न देखें। केवल वही इनफॉर्मेशन कंज्यूम करें जो आपके मन और शरीर दोनों के लिए स्वस्थ हो।

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