सालासर सुन्दरकांण्ड हनुमान चालीसा जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा मे आज भक्त केवट की पावन कथा एवं भरत चरित्र की कथा में भारी भीड़
नवापारा-राजिम
सालासर सुन्दरकांण्ड हनुमान चालीसा जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा अयोध्या से पधारे श्रीं राम कथा के सुप्रसिद्ध वक्ता परम् पूज्य प्रशांत जी महराज ने बताया भगवान अयोध्या से वनवास के लिए निकले भगवान ने अयोध्या वासियों के साथ प्रथम पड़ाव तमसा तट पर किया आगे श्रृंगवेरपुर नामक स्थान पर पहुंचे जहां के निषाद राज गुह उनके मित्र थे और उन्होंने गंगा नदी पार कराने के लिए केवट को बुलाया केवट का इनकार और शर्त भगवान गंगा के घाट पर पहुंच कर केवट से नाव मांगी मगर केवट नहीं आया ।मांगी नाव न केवट आना कहहि तुम्हारे मरमु मैं जाना भगवान ने केवट से पुनः नाल मांगी केवट आया मगर क्षी राम लक्ष्मण मां जानकी को नाव पर बिठाने के लिए मना कर दिया उसने कहां प्रभू सुना है आपके चरणों की रज में जानदू है जिसके स्पर्श से पत्थर की सिला नारी बन गई
इस लिए केवट डर रहा है की मेरी लकड़ी की नाव अगर स्त्री बन गई तो मैं अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करूंगा ऐहि प्रति पालहु सब परिवारु इस लिए केवट ने भगवान से कहा प्रभू जब तक मैं आपके चरणों का प्रक्षालन नहीं करेंगे तब तक हम आपको नाव पर नहीं बिठाएंगे भगवान ने केवट को पादप्रक्षालन की कोशिश अनुमति दी फिर केवट ने बड़े भाव से भगवान के पैर धोए चरणामृत अपनी पत्नी और अपने बच्चों को पान कराया और विधाता की सराहना कर रहा है नाविक की भक्ती भगवान देखा तो भगवान केवट को गंगा पार उतराई देना देना चाहा तो केवट ने उताराई लेवे से इन्कार कर दिया केवट ने कहा भगवान मुझेमे और आपमें विषेश अंतर नहीं है आप भवसागर पार करते हैं और मैं गंगा पार कराता हूं मानो केवट भगवान से ये कहना चाहता है भगवान मुझे इस भव सागर से पार कर दो भगवान ने केवट की यह भक्ति देखकर जन्म मरण चक्कर से छुटकारा प्राप्त होने का आशीर्वाद दिया और मोक्ष प्रदान किया ये प्रसंग संकेत कर रहा है की सच्ची श्रद्धा और भक्ति होने पर सहजता से सामान्य से सामान्य व्यक्ति भगवान की कृपा को प्राप्त कर सकता है भगवान ने केवट को आशीर्वाद प्रदान कर चले अवध धाम से पधारे परम् पूज्य प्रशांत जी महराज जी ने बताया कि। सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।
हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ महराज जी ने बताया जीना , मरना ,लाभ होना , हानि होना , ये सब भगवान की कृपा से प्राप्त होता है रामायण में भरत के चरित्र का विश्लेषण" - लेखों में भरत के क्रोध, विचारों और राम के प्रति निष्ठा को दर्शाया जाता है, जहाँ वे कैकेयी के कहने पर राज्य पाने से इनकार करते हैं. भरत का अपने भाई राम के प्रति अटूट प्रेम और निष्ठा.राजसिंहासन का त्याग कर भरत ने त्याग की मिसाल कायम की.भरत का गुरु वशिष्ठ और मंत्रियों के साथ चित्रकूट जाकर राम को मनाने का प्रयास.भरत के चरित्र को स्वार्थ और परमार्थ का संतुलन दर्शाने वाला बताया जाता है, जो आज भी प्रासंगिक है. परम् पूज्य प्रशांत जी महराज ने बताया की श्री राम चरित मानस की कथा हमको जीना सिखाती है पूज्य श्री ने बताया भाई भाई का संबंध संपत्ती बांटने के लिए नहीं होता भाई भाई का संबंध विपत्ती बांटने के लिए होता है इस प्रकार महराज जी ने भरत चरित्र का का प्रसंग सुनाया जिससे उपस्थित सभी श्रोता समाज कथा का रसपान कर भावुक हुए ,आज के कथा के मुख्य यजमान,मनोज बबलू विश्वकर्मा , श्रीमती पुष्पलता विश्वकर्मा एवम परिवार थे,आज के कथा,में बालोद,गुरुर,रायपुर,राजिम,अभनपुर, पारागांव,तरी,पटेवा,पिपरौद,छांटा, नवापारा,एवम आसपास से काफी संख्या में श्रोतागण पहुंचे थे

