रूख्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा श्रद्धालुओं का मन

 रूख्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा श्रद्धालुओं का मन



आरंग(लखौली)


ग्राम धमनी के गुड़ी चौक में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भक्तिरस अपने चरम पर पहुंच गया। व्यासपीठ से संत श्रीरामानन्द जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रूख्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का विस्तारपूर्वक, भावपूर्ण और रसपूर्ण वर्णन किया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयघोष करते नजर आए।व्यास संत श्रीरामानन्द जी ने रूख्मिणी विवाह कथा के माध्यम से बताया कि सच्चा प्रेम अहंकार, भय और बंधनों से परे होता है। उन्होंने कहा कि माता रूख्मिणी का श्रीकृष्ण को पत्र लिखना आत्मसमर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक है। जब-जब भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, प्रभु स्वयं उसकी रक्षा के लिए उपस्थित हो जाते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा रूख्मिणी का हरण और विधि-विधान से विवाह यह संदेश देता है कि धर्म, प्रेम और सत्य की अंततः विजय होती है।कथा के दौरान श्रीरामानन्द जी महाराज ने रूख्मिणी के धैर्य, साहस और भक्ति को आदर्श नारी चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया। वहीं श्रीकृष्ण को करुणा, मर्यादा और धर्म के रक्षक के रूप में बताते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन भी यदि धर्म और भक्ति से जुड़ा हो, तो वह साधना का श्रेष्ठ मार्ग बन जाता है।इस पावन आयोजन के आयोजक देवराज जांगड़े, पूजा जांगड़े एवं सरपंच काव्या भोला जांगड़े की ओर से कथा में पधारे समस्त श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया। आयोजक परिवार ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सद्भाव और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने ग्रामवासियों से अंतिम दिवस की कथा एवं पूर्णाहुति में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की।छठवें दिन कथा स्थल पर भजन-कीर्तन, झांकी और विवाह प्रसंग के सजीव वर्णन से पूरा गुड़ी चौक भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने आरती व प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित

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