फिंगेश्वर में कृषि कालेज का आंदोलन बना ऐतिहासिक, 15 घंटे की प्रदर्शन उपरांत रात्रि 1 बजे पहुंचे कलेक्टर, एसपी एवं विधायक दिया आश्वासन
अंकुर पहाड़िया (फिंगेश्वरः-)
कृषि कालेज फिंगेश्वर में बनाने की मांग को लेकर लगभग 15 घंटे का ऐतिहासिक धरना प्रदर्शन, महाबंद एवं चक्का जाम का कार्यक्रम रात्रि लगभग 2 बजे जिला कलेक्टर, एसपी एवं विधायक रोहित साहू द्वारा स्थानीय विश्राम गृह में आंदोलनकारी, प्रतिनिधि मंडल के साथ चर्चा के बाद काफी कशम कश की स्थिति में स्थगित किया गया। कृषि कालेज की मांग करते हुए 30 जनवरी से चल रहा धरना प्रदर्शन 2 जनवरी को दोपहर 3 बजे चक्का जाम में बदल गया।
नगर विकास सेवा एवं संघर्ष समिति के तत्वाधान में पिछले 9 माह से फिंगेश्वर में कृषि कालेज के लिए प्रयासरत है, परंतु सभी अनुकुल स्थिति के बाद भी प्रशासनिक षडयंत्र, तकनीकी स्थिति के साथ साथ दुर्भाग्य के चलते फिंगेश्वर में कृषि महाविद्यालय बनने की सहमति नहीं बन पा रही है। 50 एकड़ से ज्यादा एकमुश्त एक जगह भूमि की आवश्यकता बताते हुए फिंगेश्वर का दावा खारिज करने का षडयंत्र किया गया। फिंगेश्वर में एकमुश्त इससे ज्यादा सरकारी जमीन है, परंतु उस भूखण्ड को अप्रत्याशित रूप से कृषि कालेज के लिए अनउपयुक्त बताया जा रहा है। भूभाग का इतना विशाल भूखण्ड के अनउपयुक्त बनाने वह भी भवन कालेज छात्रावास बनाने में अनउपयुक्त कैसे समझ नहीं आया। 2 जनवरी को लगातार 4 थे दिन धरना प्रदर्शन के बाद 3 बजे से चक्का जाम प्रारंभ किया गया तो यहां हड़कंप मच गया। लगभग 450-500 की भीड़ जब चक्का जाम करने रानी श्यामकुमारी देवी चैक में बैठी तो देखते ही देखते दोनों तरफ वाहनों का लंबी लाईन लगने लगी। एक दूसरे रास्ते से जब वाहनें निकलने लगी तो भीड़ का काफिला पुलिस थाना के बाजू नहर के पास चक्का जाम शुरू किया। पहले तो अधिकारी 5 बजे तक चक्काजाम में परेशान यात्रियों को देखते भर रहे। जब शाम हुई और चक्काजाम करने वालों का काफिला काफी तेजी से बढ़ने लगा तो अधिकारी सकते में आ गए। एसडीएम विशाल महाराणा, तहसीलदार डिम्पल धु्रव ने मध्यस्थता की पहल की। लेकिन आंदोलनकारी स्पष्ट अभिमत लिखित में चाहते थे, बात बनी नहीं। आंदोलन कारी धरना स्थल पर जमकर नारेबाजी करते रहे। धरना स्थल पर ही खाने पीने की व्यवस्था होने लगी, बीच रोड में टेंट लगने लगे, स्थल पर ही भोजन बनने लगे तो अधिकारी थोड़ा सकपाए और समझाईश दी। परंतु वहां उपस्थित भागवत हरित, रामूराम साहू, अशोक साहू, दीपक पोददार, नगर पंचायत अध्यक्ष धनराज सूर्यवंशी, अरेन्द्र पहाड़िया, जितेन्द्र शर्मा, बंटी सिन्हा आदि मंच से जिला कलेक्टर को फिंगेश्वर बुलाकर बातचीत करने की मांग पर अड़े रहे। अन्ततः रात्रि 7 बजे मैसेज आया कि प्रतिनिधि मंडल गरियाबंद फिर राजिम आकर मिलने कहा गया। परंतु आंदोलनकारी बात फिंगेश्वर में ही करवाने की मांग करते रहे। रात 10 बज गए हड़ताली बीच रास्ते में ही टेंट गददा लगाने लगे। इनके लिए आंदोलन स्थल पर ही खाने पीने की व्यवस्था होने लगी। आंदोलनकारी का हौसला तैयारी एवं रात्रि 10-11 बजे की तुफानी ठंड देख फिर अधिकारी सक्रिय हुए और रात लगभग 1 बजे गरियाबंद कलेक्टर, एसपी तथा राजिम विधायक रोहित साहू फिंगेश्वर पहुंचकर आंदोलनकारी प्रतिनिधि मंडल से विश्राम गृह में मुलाकात की। जहां लंबी चर्चा, आरोप प्रत्यारोप के बीच अधिकारियों ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का आडियो सुनाया जिसमें उनका कहना था कि कृषि महाविद्यालय बनाने के लिए एक ही स्थान पर 50 एकड़ जमीन चाहिए। फिंगेश्वर में चिन्हांकित जमीन एक जगह नहीं है। इस प्रशासनिक नियम पर आपत्ति करते हुए कहा गया की जनहित, क्षेत्रहित एवं सुगमता के चलते नियम की लचीला किया जावें और महाविद्यालय तथा छात्रावास भवन फिंगेश्वर में निर्मित हो। काफी जददोजिहाद के बाद निर्णय हुआ कि एक सप्ताह के अंदर जिला प्रशासन प्रतिनिधि मंडल को कृषि मंत्री रामविचार नेताम के साथ भेंट करवाएगा जिसमें कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अधिकारी भी रहेंगे। वहां इस मामले का अंतिम निर्णय लिया जावेगा। इस पर सहमति बनने के बाद प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों के साथ एसपी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर बैठक के निर्णय की जानकारी दी और आंदोलन बंद करने का निवेदन किया। इतनी रात में भी धरना स्थल पर 250-300 लोग उपस्थित थे। आंदोलनकारियों ने अपने नेताओं से बातकर रात्रि लगभग 3 बजे चक्काजाम आंदोलन बंद किया। इस प्रकार लगभग 15 घंटो का लंबा चक्काजाम हटने के बाद जिला प्रशासन ने चैन की सांस ली। फिंगेश्वर में इस निर्णय से लोगों में नगर में कालेज का निर्णय न होने से काफी मायूसी है। पूरे नगर के साथ पूरे अंचल से जुड़ा यह मामला काफी संवेदनशील बन गया है।

